वो वक़्त तेरा नहीँ
आंसुओं में बह रहा वो रक़्त तेरा नहीँ गुज़र रहा है जो बुरा वो वक़्त तेरा नहीँ सब्र कर ज़रा तू बंदे यह घड़ी है इम्तहान की यूँही गुज़र ये जाएगा मालिश है यह थकान की अंधेरा तुझसे कहता है सवेरा तू दिखलायेगा उसको ज़रा अपना के देख तुझको भी यह अपनाएगा ख्वाहिशें होंगी पूरी अभी हार कर ठहरना नहीँ जो रह गया है अधूरा वो वक़्त तेरा नहीँ पहने हुए जो घूमता चेहरा नहीँ नकाब है हटा कर तो देख ज़रा बादलों में तेरे ख्वाब है उनको तू उड़ान दे वक़्त सुधर जाएगा हवा के झोंके की तरह बुरा वक्त भी गुज़र जाएगा बन मशाल ऐसा जो काली रातों से डरा नहीँ गुज़र रहा है जो बुरा वो वक़्त तेरा नहीँ अभी है मौका सीख ले जबतक ये वक़्त गुज़रा नहीँ जिसको तू बुरा है सोचता शायद वो वक़्त बुरा नहीँ ~RV