Posts

Showing posts with the label hindi

फाँसी पर लटकते किसान

Image
सूख रहे सब होँठ यहां बूँद बूँद को तरसने लगे है धरती फट के चीख रही पर पेड़ फिर भी कटने लगे हैं मेरे भाई के घर पर दाना नहीँ बच्ची भूखी सोने लगी है छाती पर कर्ज़ का खंजर है और जमीन बंजर होने लगी है मौसम जैसे रूठ गया है उल्टी दिशा में नदियां बहती ये रोज़ रोज़ की कड़वी हवा चट्टानों से कम, इंसानो से ज्यादा है डरती लाल हो पड़ी है आंखें रोने तक को आँसू नहीँ आसमान की ओर है तकते जल चुके हैं रूह सभी जिस्म पे दरारे हैं टूटी हुई मुस्कान बढ़ रही मीनारें और ढह रहे हैं मकान मुरझा रही है धरती मेरी छाया है मौत का समा विफल होने को इंसान अंत का ये इम्तहाँ सुकून की घड़ी नहीँ मर रहा है इंसान फोड़ते है सर चट्टानों से फाँसी पर लटकते किसान।                                                 ~RV

नारी

Image
ढोंग के बीच जो भक्ति है उसको कहते हम नारी हैं दुर्बल में जो शक्ति है उसको कहते हम नारी हैं जिसके कदमों में जन्नत है उस माँ का जग आभारी है ममता जिस जिसके हृदय में है उसको कहते हम नारी हैं सबके हित में जो समर्पित हर आत्मा संस्कारी है उस संस्कार को जो न मिटने दे उसको कहते हम नारी हैं झुक जाए हर शीश जहां वह मंदिर, मस्जिद नारी है रंक को भी राजा बनादे साथ खड़ी जब नारी है जिसके ऊपर ब्रह्मांड के निर्माण की ज़िम्मेदारी है वो प्रकृति, वो जननी और धरती माँ भी नारी है हर क्षेत्र में है सर्वश्रेष्ठ ऐसी उसकी कलाकारी है वो अबला नहीँ, लाचार नहीँ वो सर्वशक्तिशाली नारी है मैं भी नारी, तुम भी नारी हम सबके भीतर नारी है जिस भाव को पूजे दुनिया सारी उसको कहते हम नारी हैं                                           ~RV

माँ

Image
​तू दूर रहे, या पास रहे खुश रहे, उदास रहे। चेहरे को पढ़ लेगी वो महसूस भी कर लेगी वो। दुनिया से छिपा सकता है तू दुनिया को भुला सकता है तू हर दर्द, अपनी परेशानियां माँ से न छुपा सकता है तू वो जानती है, आहटें तेरी दिल में छुपे बातें तेरी जो किसी से न कह पायेगा वो भी माँ को ज़रूर बतलायेगा दुनिया जहां मुंह मोड़ भी ले पर साथ तेरा न छोड़ेगी हर इल्जाम तेरे और ज़िम्मेदारियाँ  वक़्त आने पर, अपने सिर पर भी ले लेगी। वो माँ ही है जिसके आगे  हर ताकत झुक जाती है वो माँ है जिसके कदमों पर जन्नत के रास्ते रुक जाते हैं। माँ पर अब क्या लिखूं। हम अगर शब्द है तो वो पुरी परिभाषा है माँ की यही परिभाषा है। दवा असर न करे तो नज़र उतारती है, वो माँ है जनाब, वो कहाँ हार मानती है। आप सभी को मातृ दिवस पर बहुत बधाइयां |                                                                ~RV ...